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Thursday, December 4, 2014
अच्छा छोड़ो ये बहस और तक़रार की बातें ////////////////// ये बताओ रात ख़्वाबों में क्यूँ आते हो....
उङते पॅछी का भी
एक ठिकाना होता है
बस एक मै ही
न जाने
कब तक
यूॅ ही
भटकता रहूॅगा
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